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भाई राजोआणा की रिहाई पर अकाली दल बादल ने यू टर्न लेने पर केंद्र की निंदा की

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भाई राजोआणा की रिहाई पर अकाली दल बादल ने यू टर्न लेने पर केंद्र की निंदा की

कहा कि केंद्र मामले में दोहरा मापदंड अपना रहा, वरिष्ठ नेता गजेंद्र शेखावत ने पंजाब में भाई राजोआणा की रिहाई का समर्थन किया: सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया

 

चंडीगढ़ 3मई ( हरप्रीत सिंह जस्सोवाल ) शिरोमणी अकाली दल ने आज कहा है कि उच्चतम न्यायालय में सिख भाई बंदी बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई पर अपने स्टैंड से यू टर्न लेने के लिए केंद्र सरकार की निंदा करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस मुददे पर दोहरा मापदंड अपना रही है।

शिरोमणी अकाली दल ने कहा कि ऐसा लगता है कि भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच रणनीतिक समझ बंदी सिंह परिवार की रिहाई में अड़चन बन रही है।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने भाई राजोआणा की ओर से दायर दया याचिका को खारिज कर केंद्रीय प्रस्ताव को लागू करने की मांग वाली याचिका खारिज होने के बाद कहा,‘‘ केंद्र सरकार ने सिख समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। इससे पहले 2019 में श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की उपस्थिति में भाई की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने, 2012 में शिरोमणी कमेटी द्वारा भाई राजोआणा की ओर से दायर दया याचिका के बावजूद निर्णय लेने से इंकार कर अपने वादे से मुकर गए। उन्होने कहा कि इससे दुनिया भर में नानक नाम लेवा संगत को बहुत गहरी पीड़ा दी है।

भारतीय जनता पार्टी से इस मुददे पर अपना रूख स्पष्ट करने के लिए कहते हुए सरदार मजीठिया ने कहा कि पंजाब भाजपा के पूर्व प्रभारी गजेंद्र शेखावत ने तख्त श्री दमदमा साहिब में माथा टेकने के दौरान भाई राजोआणा की रिहाई के लिए एक फाॅर्म पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि वही पार्टी सुप्रीम कोर्ट में सिख बंदी की रिहाई के रास्ते में आ रही है,जो पवित्र तख्त का भी अपमान है’’।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘ बिलकिस बानो के बलात्कारी की रिहाई के बाद सिख समुदाय पहले से ही महसूस कर रहा है कि उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है, क्योंकि वह अल्पसंख्यक हैं, लेकिन जिस तरह से केंद्र ने पिछले दिनों भाई राजोआणा की रिहाई को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश की,हलफनामें ने इसे और भी आहत किया है। उन्होने कहा, ‘‘ सिखों ने देश की आजादी के लिए सबसे अधिक बलिदान दिया है और अब भी देश की सीमा की रक्षा कर रहे हैं। उन्होने कहा कि समुदाय को लगता है कि भाई राजोआणा की रिहाई से सुलह की प्रक्रिया में मदद मिलेगी और केंद्र को इसका विरोध करने के बजाय इस भावना का सम्मान करना चाहिए।

सरदार मजीठिया ने कहा कि जब उसने भाई राजोआणा की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाएगा और आठ अन्य सिख बंदियों , जिन्होने जीवन की सजा का लगभग दोगुना समय जेल में पूरा कर लिया है, सिख समुदाय को लगता है कि केंद्र 2019 में की गई प्रतिबद्धता को बरकरार रखेगा। उन्होने कहा, ‘‘ बड़े दुख की बात है कि इस वादे का पूरा नही किया गया और भाई राजोआणा सहित सभी बंदी सिंहों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।

इस बीच बंदी सिंहों की रिहाई के मुददे पर भाजपा और आप के बीच रणनीतिक समझ के बारे सरदार मजीठिया ने कहा कि दिल्ली की आप पार्टी की सरकार ने भी भाजपा के समान रूख अपनाया और प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई को रोक रही है। उन्होने कहा, ‘‘ केंद्र की तरह दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार प्रो. भुल्लर की रिहाई के आदेशों को दबाकर बैठी है, क्योंकि सजा समीक्षा बोर्ड की बार बार मीटिंगों के बावजूद मामले पर फैसला नही किया जा रहा है।

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